बिना रिश्वत अपना काम निकलवाने के प्रधान निर्देश
सरकारी बाबू (कर्मचारी या अधिकारी) रिश्वत की राशि निकलवाने के लिये विभिन्न तरीके अपनाते हैं। आपको इन अनूठे तरीको का मुकाबला करने के लिए विभिन्न कदम उठाने होगें। ये एकदम बेहद आसान और नतीजा देने वाले हैं। मैंने इन तरीको को अपनाया है जिसके काफी सार्थक परिणाम सामने आए है।
1. अनावश्यक विलम्ब:- वे आपका काम तब तक रोके रखेंगे जब तक आप उनके सामने रिश्वत की मोटी रकम लेकर नहीं जाते।
समाधान:- सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर नहीं लगाइये-इससे आपके जूते घिसने या समय बिगड़ने के अलावा कुछ नहीं होने वाला। आप पत्रों के माध्यम से अपने काम को पूरा करें। इन पत्रों को कोरियर, पंजीकृत डाक अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा जा सकता है। स्थानीय स्पीड पोस्ट पत्र महज 12 रूपए तथा कोरियर 5 रूपए में उपलब्ध है। इसके अलावा आप आरटीआई एक्ट यानी सूचना के अधिकार का भी उपयोग कर सकते है इसके लिए महज 10 रूपए का ही खर्चा होता है। इस कानून के माध्यम से आप अपनी शिकायत अथवा आवेदन की स्थिति का पता लगा सकते है।
2. अनावश्यक कागजों और दस्तावेजों की मांग:- कई बार ऐसा होता है कि अधिकारी अथवा कर्मचारी फरियादी से अनावश्यक कागजात अथवा दस्तावेज की मांग करते हैं और इन्हे नहीं देने की स्थिति में रिश्वत की मांग करते है।
समाधान:- यदि आपसे वे इन कागजों के बदले में रिश्वत मांग रहे हैं तो निश्चित तौर पर यह कागज आपके आवश्यक काम में बाधक नहीं हैं। महज परेशान करने की गरज से बाबू आपसे इन दस्तावेजों की मांग कर रहा है। ऐसे हालात में (1) आप बाबू को जिन कागजों की जरूरत है, उनके बारे में लिख कर देने को कहें और इस पत्र को संभाल कर रखें। (2) आप उस बाबू अथवा अधिकारी को पत्र लिखें कि क्या यह कागज अथवा दस्तावेज पेश करना नियम अथवा कानून के अनुसार जरूरी हैं ? इसके लिए आप आरटीआई एक्ट का प्रयोग कर सकते है। (3) आरटीआई एक्ट का प्रयोग कर आप विभाग से यह पता कर सकते हैं कि आपसे पूर्व के आवेदकों ने भी क्या इस प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध करवाए थे (4) जो भी कागजात जरूरी हों उन्हें पंजीकृत डाक के जरिए भेंजे, किसी दस्तावेज को बिना रसीद नहीं दें।
यहां यह भी याद रखें कि कोई भी अधिकारी बिना आवश्यक दस्तावेज के आपका काम नहीं करेगा क्योंकि वह अपनी फाइल (छवि) साफ रखना चाहता है।
3. वह आपको सलाह देंगे कि आप हमें रिश्वत दें ताकि आपका टैक्स/जुर्माना आदि बचा सकें। कई बार वे जुर्माने की एवज में एक मोटी रकम की मांग रखते हैं जितनी रकम की कानून भी इजाजत नहीं देता।
समाधान:- (1) आपमें अगर माद्दा है तो कानून को देखें। (2) उस कर्मचारी अथवा अधिकारी के साथ रिश्वत के बारे में आपके साथ हुई वार्तालाप को रिकॉर्ड करें और उन्हें कहें कि वह इस टेप को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के पास भेज रहें हैं। (3) आरटीआई एक्ट का प्रयोग कर यह पता लगाए कि आपसे पूर्व के आवेदकों ने ऐसे ही हालात होने पर कितनी राशि का भुगतान किया था। 4. जब बाबू ही उपस्थित न हो कार्यालय में:-
समाधान:- एक पत्र लिखें जिसमें बताएं कि मैं आपके कार्यालय पर दिनांक.............. (जो भी दिनांक हो) को 11 बजे आया था, लेकिन आप नहीं मिले। आपके अधीनस्थ श्री......................... ने मुझे दोबारा दिनांक......................... को आने को कहा। आपका यह पत्र उस बाबू को आपके काम के प्रति विशेष रूचि उत्पन्न करेगा।
5. जब कोई काम नहीं करे तो इसे आजमाये:- समाधान:- जब आपके सामने किसी भी तरह से अपना काम निकलवाने का विकल्प नहीं बचता है तो आप उस बाबू को घूस दें और अपना काम निकलवा लें और इस बातचीत की रिकॉर्डिंग कर लें। काम निकलने के बाद उस बाबू से सम्पर्क करे और कहें भाई बहुत हो लिया, मेरे पैसे लौटा, नही ंतो मैं तेरी शिकायत कर दूंगा। उसे जागो पार्टी के बारे में बताएं। अपने साथ जागो पार्टी के कुछ पम्पलेट्स या विज्ञापन की प्रति ले जाएं। उसे देखकर उस बाबू अथवा अधिकारी के पसीने छूट जाएंगे और वह रिश्वत में ली आपकी रकम लौटा देगा।
6. शिकायत करने की आदत डालें:- जब आपको कहीं पर भी अपराध और भ्रष्टाचार नजर आए तो इसकी शिकायत उस विभाग के सबसे बड़े अधिकारी, भ्रष्टाचार निरोधक विभाग, सीबीआई, स्थानीय समाचार पत्र और जागो पार्टी को अवश्य करें।
7. इतना भी मत झुकें:-
बाबुओं को सर को सम्मान देने के स्थान पर उनके नाम से बुलाएं। नम्र रहें लेकिन बाबू के प्रति अनावश्यक सम्मान भी प्रदर्शित नहीं करे। अपने आपको आत्मविश्वासी बनाए रखें। उनसे आरटीआई एक्ट और जागो पार्टी के बारे में चर्चा करें। गोैरतलब है कि बाबू जानकार या ज्ञानी लोगों से हमेशा डरे रहते हैं। यह तरीके आपको अविश्वसनीय लग सकते हैं पर एक बार अगर आप इनका प्रयोग करेंगे तो पाऐंगे कि ये कितने प्रभावशाली है।
याद रहे - छोटा सा कदम किसी बड़ी इच्छा से बेहतर है
सूचना के अधिकार (आरटीआई एक्ट) का प्रयोग करना:
आप सरकारी दफ्तरों में अपना काम जल्द निकलवाने के लिए आरटीआई एक्ट का प्रयोग एक हथियार के रूप में कर सकते हैं इससे ज्यादा और क्या बात होगी कि बिना रिश्वत के ही आपका काम आसान हो जाएगा। यहां कुछ उपयोग मंे लाये गये उदाहरण पेश किए जा रहे है:-
1. इजाजत मिलने/काम पूरा करवाने में विलम्ब होने इत्यादि पर:- आप आरटीआई एक्ट के तहत आवेदन कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। अमूमन होता यह है कि कोई भ्रष्ट अधिकारी आपकी फाइल अथवा आवेदन पर कुण्डली मार कर बैठ जाते है ताकि उसे सुविधा शुल्क आसानी से मिल जाए। बिना आरटीआई एक्ट कानून के प्रावधान का प्रयोग करे आपको इस तथ्य का पता नहीं चल पाता। आरटीआई आवेदन के खौफ से उक्त अधिकारी अपनी कुण्डली को तोड़ कर आपका काम जल्दी जल्दी कर देते है। इसके साथ ही आप अपनी शिकायतों का स्तर पता करने के लिए भी आवेदन कर सकते है। एक बार मैंने अपनी सम्पत्ति कर में परिवर्तन के लिए सिंकदराबाद नगरपालिका में आवेदन किया। उन्होंने साधारण तौर पर रिश्वत के लिए रोके जाने वाली फाइलों की तरह मेरी फाइल को भी रिश्वत के लिए दबा रखा था। मैने जब आरटीआई एक्ट के तहत आवेदन किया तो अधिकारियों की सिट्टि-पिट्टी गुम हो गई और कुछ ही दिनों के भीतर उन्होंने मुझे वांछित दस्तावेज उपलब्ध करवा दिए। इतना ही नहीं ये सारे दस्तावेज मेरे निवास पर पहुंचाए गए।
2. दण्डनीय शुल्क/कर/जुर्माना: जब आपको ऐसा लगे कि आपको किसी विभाग ने निर्धारित से अधिक शुल्क या जुर्माने की मांग किन्हीं नियमों के आधार पर की है तो इस प्रकार के शुल्क अथवा जुर्माने का तत्काल भुगतान मत कीजिये। उन्हें वह कानून दिखाने के लिये कहें जिनके तहत यह राशि वसूली जा रही है। इसके लिये विभिन्न प्रक्रियाओं के लिये वसूले जाने वाले शुल्कों की कॉपी आपको रखनी होगी जो कि विभिन्न वेबसाइट्स पर उपलब्ध है। यदि आपको बिना प्रमाणीकरण के भुगतान करना पड़ रहा है तो अन्य लोगो ं द्वारा इसी काम के लिये चुकाई गई फीस का ब्यौरा आरटीआई एक्ट के तहत आप विभाग से पूछ सकते है। हाल ही में एक यातायात निरीक्षक ने मेरी कार के अवधि पार हो चुके प्रदूषण सर्टिफिकेट की एवज में 600 रूपये की मांग की जबकि नियमानुसार यह राशि 300 रूपये की ही होती है।
3. टूटी -फूटी सड़कें: अगर आप कहीं टूटी फूटी सड़क देखते हैं तो आप आरटीआई एक्ट के तहत निम्न जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं। (1) पिछले दो सालों के दौरान इस सड़क पर कुल कितनी राशि व्यय की गई। (2) सड़क निर्माण की निविदा की प्रतिलिपि (3) गुणवत्ता के लिये जिम्मेदार अधिकारी का नाम (4) उस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई (5) क्या इस सड़क को बनाने वाला ठेकेदार दोषी था ? इसके अलावा आप सरकार अथवा सरकार की सहायता से चलने वाले निकायों की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली किसी भी सेवा के बारे में इस कानून के तहत जानकारी हासिल कर सकते हैं। 4. अनावश्यक कागजी खानापूर्ति: किसी भी फाइल को रोकने का एक आसान तरीका अधिकारियों या कर्मचारियों के पास यह भी होता है कि वे उस पत्रावली में अवांछित कागजों यानी दस्तावेजों की कमी बता कर काम को टालते हैं। इसके लिये आपके पास आरटीआई एक्ट यानी सूचना का अधिकार है। आप इस अधिकार के माध्यम से विभाग से पूछ सकते हैं कि उनके काम के लिये क्या इन दस्तावेजो अथवा कागजों का होना अत्यंत जरूरी है। आप यह भी पूछ सकते हैं कि क्या मुझसे पूर्व के आवेदकों से इस प्रकार के दस्तावेज मांगे गए थे ?
5. सरकारी रिकॉर्ड की जाँच: सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए आप किसी भी सरकारी कार्यालय जाकर वहाँ के रिकॉर्ड्स को चेक कर सकते हैं। हकीकत में देखा जाये तो आरटीआई एक्ट आपका काफी शक्तिशाली हथियार है और इसका उपयोग कमोबेश हर समस्या के समाधान के लिये किया जा सकता है। आप अपनी किसी विशिष्ट शिकायत को हमें हमारी वेबसाइट पर बने गेस्टबुक लिंक के द्वारा भी भेज सकते है। हम शिकायत मिलने के 48 घंटों के भीतर आपकी शिकायत को सम्बन्धित विभाग तक पहुँचा देंगे। आपकी शिकायतें मतलब रखती हैं।
हाल ही में जयपुर में आयोजित 500 लोगों की एक सभी के दौरान मैंने पूछा, आपमें से कितनों ने अब तक अपनी शिकायत लिखित में की हैं ? आपको जानकर आश्चर्य होगा कि केवल एक महाशय ने अपना हाथ खड़ा कर हाँ में सहमति दी शेष 499 के पास कोई जवाब नहीं था। सबसे आश्चर्य वाली बात तो यह थी कि एक भ्रष्ट अधिकारी ने अपनी सेवा का 30 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया और किसी ने उसके भ्रष्टाचार की शिकायत नहीं की।
हमें लगातार इस प्रकार के समाचार पढ़ने को मिलते हैं कि अमुक विदेशी का शोषण हुआ/बलात्कार हुआ लेकिन ऐसे समाचार कम ही सुर्खियों में रहते हैं कि जिसमें भारतीय लड़की भी शामिल हों। क्यों ? इसका कारण हमारी संस्कृति है, हमें बचपन मंे सिखाया जाता है कि हमें सर्वदा संतोषी रहना चाहिये संतोषम् परम सुखम्। अपराध भ्रष्टाचार और अन्याय के दायरे से मुक्त होने के लिये हमें लगातार शिकायतें करनी चाहिये। हमारा दावा है कि 1 प्रतिशत लोग भी यदि शिकायतें करना शुरू करते हैं तो एक दिन ऐसा आएगा जब इन शैतानों को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। मुझे इस बारे में कई सार्थक परिणाम भी मिले हैं।
उदाहरण के तौर पर दो वर्ष पूर्व में आगरा गया था । वहाँ मैं जूते की एक दुकान पर गया जहाँ मैनें एक जोड़ी जूते का ऑर्डर दिया वह मॉडल उस समय उपलब्ध नहीं था। दुकानदार ने कहा कि आप 600 रूपये बतौर एडवांस दे जायें शेष राशि 600 रूपये माल की प्राप्ति पर दे देना। मैंने उसकी शर्त मानते हुए बतौर एडवांस 600 रूपये उसे दे दिये। बीस दिन बाद मुझे वीपीपी पार्सल हैदराबाद में मिला जिस पर मैंने शेष राशि 600 रूपये का भुगतान भी कर दिया। लेकिन जब पार्सल को खोला तो मैं चौंक गया क्योंकि दुकानदार ने दूसरे जूते भेजे थे और वह भी घटिया दर्जे के जिसका मैंने उसे भुगतान किया था वह जूते नहीं भेजे थे। जब दुकानदार से मैंने फोन पर सम्पर्क किया तो उसने जूते बदलने से मना कर दिया। मैंने आगरा के एसएसपी को पत्र लिख दिया और इस घटना की जानकारी मुख्यमंत्री तक भेजी। इसका नतीजा यह निकला कि मुझे दुकानदार को चुकाई गई पूरी राशि का भुगतान हो गया।
एक बार की बात है मेरे एक अंकल है जो कि भारतीय रेलवे दिल्ली में कार्यरत है। उनसे हुई बातचीत और अनुभवों में से एक में मैं आपको भागीदार बनाना चाहता हँू। कई बार यात्री रेलवे कर्मचारियों पर नाराज हो जाते है। पंजाबी लोग ज्यादा उग्र स्वभाव के होते हैं। पंजाबी गर्मागर्म शब्दों का प्रयोग करते हैं और हमारे ऊपर जोर से बोलते हैं। वहीं मद्रासी लोग साधारणतः काफी ठंडे और शांत स्वभाव के होते हैं, लेकिन वे लिखित में शिकायत करना पसंद करते है और यही कारण है कि सभी रेलवे कर्मचारी मद्र्रासी यात्रियों से खौफ खाए रहते हैं।
लिखित संवादांे की शक्ति:
किसी सरकारी अधिकारी से लिखित संवाद करना बहुत महत्वपूर्ण है, कोरी शिकायतें करने या विचार विमर्श करने से कोई नतीजा नहीं निकलता। इसलिये आप अपनी शिकायत हमेशा लिखित में कीजिए। उदाहरण के लिये:
1. मान लीजिये कि आपके पास किसी सरकारी काम में निर्धारित समय से विलम्ब हो रहा है तो उसे विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी को संस्मरण पत्र (रिमांइडर) पंजीकृत डाक या कोरियर से भेंजे। 2. जब वे किन्हीं अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग करें, तो उन्हेें भी डाक द्वारा ही प्रेषित करें। साथ में अपना एक पत्र भी भेंजे जिसमें लिखा हो आप द्वारा चाहे गए कागजात प्रेषित किए जा रहे हैं, अब इस काम में विलम्ब न होने दें।
3. यदि आप किसी सरकारी कार्यालय में जाते हैं और वहाँ सम्बन्धित व्यक्ति उपलब्ध नहीं होता है तो तत्काल एक पत्र लिखें जिसमें बताएं कि आप अमुक दिन उनके कार्यालय पर गए थे, लेकिन आपसे सम्पर्क नहीं हो पाया क्योंकि आप वहाँ पर उपलब्ध नहीं थे।
4. अपनी कोई भी शिकायत लिखित में उस विभाग के जिला एवं राज्य प्रमुख को भी भेंजे। आपका तर्क कोई महत्व नहीं रखता, लेकिन जो शिकायत लिखित मंे की जाती है उनका काफी महत्व होता है और उन पर कार्यवाही भी होती है।
अधिकतर किसी बाबू या अधिकारी की मांग न्याय संगत नहीं होती, एक बार यदि उन्हें कोई भी वादा लिखित में पूरा करने के लिए कहें तो वे आपको परेशान करना छोड़ देंगे और बिना किसी प्रकार की रिश्वत दिये आपका काम जल्दी हो जाएगा।
दो रूपये भेजकर भारत को नया स्वरूप दें
जब कभी भी आप किसी अपराध, भ्रष्टाचार अथवा अन्य किसी मामले को देखते हैं तो इसके बारे में कुछ पोस्टकार्ड्स पर लिख कर इन्हे स्थानीय समाचार पत्रों, टीवी न्यूज चैनल्स, सम्बन्धित सरकारी विभाग के वरिष्ठतम अधिकारियों तथा जागो पार्टी को भेंजे। याद रखें - मौखिक तर्क काम नहीं करता, लिखित शिकायत तुरंत काम करती है, यदि किसी मामले में आप अपनी पहचान नहीं बताना चाहते तो उस शिकायत को किसी गुमनाम व्यक्ति के नाम से भी कर सकते है।
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