किसी सरकारी अधिकारी से लिखित संवाद करना बहुत महत्वपूर्ण है। कोरी शिकायतें करने या विचार विमर्श करने से कोई नतीजा नहीं निकलता। इसलिए आप अपनी शिकायत हमेशा लिखित में कीजिए।
उदाहरण के लिये
1. मान लीजिए कि आपके किसी सरकारी काम में निर्धारित समय से विलम्ब हो रहा है। तो उस विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी को संस्मरण पत्र(रिमाइण्डर) पंजीकृत डाक या कोरियर से भेजें।
2. जब वे किन्हीं अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग करें, तो उन्हें भी डाक द्वारा ही प्रेषित करें। साथ में अपना एक पत्र भी भेजें जिसमें लिखा हो आप द्वारा चाहे गए कागजात प्रेषित किए जा रहे हैं अब इस काम में विलम्ब न होने दें।
3. यदि आप किसी सरकारी कार्यालय जाते हैं और वहां सम्बन्धित व्यक्ति उपलब्ध नहीं होता, तो तत्काल एक पत्र लिखें जिसमें बताएं कि आप अमुक दिन उनके कार्यालय पर गए थे, लेकिन आपसे सम्पर्क नहीं हो पाया क्यों कि आप वहां पर उपलब्ध ही नहीं थे।
4. अपनी कोई भी शिकायत लिखित में उस विभाग के जिला एवं राज्य प्रमुख को भी भेजें। अपका तर्क कोई महत्व नहीं रखता, लेकिन जो शिकायत लिखित में की जाती है उनका काफी महत्व होता है और उन पर कार्रवाई भी होती है।
अधिकतर किसी बाबू या अधिकारी की मांग न्याय संगत नहीं होती। एक बार यदि उन्हें कोई भी वादा लिखित में पूरा करने के लिए कहे, तो वे आपको परेशान करना छोड़ देंगे और बिना किसी प्रकार की रिश्वत दिए आपका काम जल्दी भी हो जाएगा।